चश्मा या गॉगल्स

शिवम एक नौकरी में इंटरव्यू के लिए जयपुर जा रहा था, जयपुर में शिवम का ननिहाल भी है। वह अभी कुछ दिन पहले ही अपने ननिहाल अपने मामा जी की शादी में आया था।
वह ननिहाल पहुँचा।
अगली सुबह तैयार होते वक़्त शिवम के नाना बोले-
“बेटा……जरा मेज पर से चश्मा ले आना”
“जस्ट वन मिनट नानू…….. ये लो अपने गॉगल्स”
“बेटा गॉगल्स ये तेरे लाल, पीले, हरे, नीले चश्मे होंगे; ‘नौटंकी के जोकर वाले’। मेरे चश्मे को तू चश्मा ही रहने दे।”
“क्या नानू………इतनी खिंचाई क्यूँ करते हो????”
“चल नहीं करता खिंचाई अच्छा ये सर्कस वाले पैजामे तुम्हारे हैं?”
“नानू……trousers बोलते हैं इन्हें”
“हहहाहहाहा” नानू ने ठहाका लगाया।
“क्यों…… बच्चों को परेशान करते रहते हो होगा तुम्हारा जमाना तुम्हारा जमाना।….. ले बेटा शिवम दही चीनी खा इंटरव्यू अच्छा होगा।” …….ये शिवम की नानी जी थीं।
“अम्म्म……..बहुत मीठा है……पाआआअनीई ई ई…”
“ले पानी पी ले”
“मेरी अच्छी नानी……..अच्छा नानू चलता हूँ”
“जीते रहो बेटा मैंने माता रानी से बोल दिया है सिलेक्शन पक्का समझ”
शिवम के पीछे से नानू चिल्लाये।
.
“क्यूँ दिन भर सबके मुंह लगे रहते हो। कभी दूसरे की भी मान लिया करो। चार दिन हुए थे बहू को घर में आये हुए कि उसके सामने बेटे को डांट दिया। और स्नेहा को पता नहीं क्या बोल दिए मुँह फुलाए बैठी है। अरे बेटी है तुम्हारी बच्चे बड़े हो गये हैं।”
नानी ये डोज नानू को रोज़ देती थी।
“हाँ………..बस तुम माँ, बेटी, बहू, बेटे सब सही हो एक मैं ही गलत हूँ।मेरी तो कोई वैल्यू ही नहीं है घर में….”
“अरे सठियाये जैसी बाते करते हो”
“हाँ हम सठिया गये और तुम कन्याकुमारी हो”
“अरे कम से कम कुछ सोच समझ के किया करो नई बहू के सामने बर्र-बर्र लगाये हैं”
“अरे तुम खुद लगाये हो बर्र-बर्र”
.
झल्लाते हुए नाना जी चले गये अमर शहीद पार्क। कई वृद्ध जिनकी या तो पेंशन बंद थी या घर पे जिनका कोई मतलब नहीं था; यहाँ आते थे।
गाँवों की चौपाल समझिये। और फिर बैठकर घंटो नई पीढ़ी की खिंचाई करना, रामचरित मानस की व्याख्या करना बस यही कुछ गिने चुने काम थे।
उधर………
दरवाजे पर दस्तक हुई, विराट था शिवम के नवविवाहित मामा।
“मम्मी हम लोग वैष्णों देवी जा रहे हैं”
“कब बेटा??” नानी ने पूछा
“अगले हफ्ते”
“ठीक है” नानी ने स्वीकृति में सिर हिलाया
तब तक शिवम चिल्लाते हुए आया
“…. नानी…. नानी…..नानी…..मुझे जॉब मिल गई”
“अरे वाह” शिवम ने नानी को जोर से पकड़ के घुमा दिया।
तब तक धीरे से एक आवाज आई…….
“श्श….सुनिए जरा इधर आइयेगा”
मौका देख कर नई मामी ने पुराने मामा को बुलाया।
विराट कमरे में गया।
“टिकट बुक हो गये हैं…..मैं आप मम्मी जी स्नेहा, मेरे मम्मी पापा और भाई बहन कुल मिलाके 8 लोग चल रहे हैं”
“…….और पापा” विराट ने पूछा।
“पापा घर पर रहेंगे घर पर भी तो कोई रहना चाहिए”
विराट ने छेड़ना चाहा-
“तुमने श्रवण कुमार की कहानी सुनी है ना…..”
“Don’t you think virat this concept is outdated….. नईबहू के साथ….. क्या ससुर जी भी घूमेंगे। तुम जाकर बोल दो।”
“ठीक है” विराट बोला।
“i love you……viraat” मामी जी ने एक चिपका दिया।
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बेचारे इन अरेंज्ड लव मैरिज वालों के साथ बड़ी विडंबना होती है न खुद को दोष दे सकते हैं न घर वालों को।
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शिवम जो कि मामी के कमरे में अपनी नौकरी की खुशखबरी देने जा रहा था, कमरे के बाहर ये वार्तालाप सुनकर अचानक जैसे उन शब्दों के बहाव ने उसके क़दमों की दिशा बदल दी हो। वो नानू को लेने चला गया अमर शहीद पार्क।
.
दूर से ही नानू अपने पुराने दोस्त शर्मा जी के साथ बैठे दिख गये।
.
“….नानू……नानू……नानू मुझे जॉब मिल गई”
“अरे……वाह मैंने पहले ही बोला था…….. ले माता रानी का प्रसाद खा।”
“नानू चलिए घर चलते हैं”
“ठीक है चलो; अच्छा शर्मा जी नमस्कार!”
“जी नमस्कार! बधाई हो! शिवम बेटा” शर्मा जी बोले।
“थैंक यू” ……शिवम ने फ़ॉर्मली जवाब दिया।
“नानू रेलवे में नौकरी लगी है इंजिनियर की”
“पता है बेटा एक बार हम तुझे लेकर हरिद्वार गये थे। वहाँ स्वामी जी ने कुंडली देखकर ही बता दिया था लड़का इंजिनियर या टीचर बनेगा।”
“नानू आप हरिद्वार गये हो??”
“अरे! बेटा हम बहुत घूमे हैं; तुम्हारी नानी के साथ रामेश्वरम, द्वारिका ,पुरी, मथुरा तमाम तीर्थ यात्राएँ। कभी कभी तो तेरी नानी जाने से मना कर देती थीं। तो मैं अकेला तेरे मामा को लेकर घूम आता था। 5 साल का था विराट जब उसे लेकर पहाड़ पर चढ़ाई करनी थी। उसे काँधे पर बिठाकर चढ़ाई की। कभी रोने लगता या जिद पकड़ लेता तो समझाने में घंटो लग जाते थे।
अरे वो हमारी जवानी के दिन थे अब तो चला भी नहीं जाता। तुम लोग जहाँ घुमा दो।”
अचानक नानू की बातों में एक दर्द छलक आया।
.
बातों बातों में घर आ गया। घर में घुसते ही नानी जी जो अक्सर नाना जी से गुस्से से बात करती थीं बोलीं-
.
“सब लोग वैष्णों देवी जा रहें हैं…..”
.
अचानक गॉगल्स के पीछे बूढ़ी आँखों में चमक आ गई।
नानी जी ने कहना जारी रखा-
.
“…..आप घर पे रहेंगे कहीं पार्क वार्क मत जाईयेगा।”
और फिर चश्मे के पीछे की चमक गायब हो गई जैसे किसी गाँव में लाइट आई और गई।
शायद उस दर्द को शिवम ने समझ लिया था।
.
पर नानू हँसे और बोले
.
“चलो भाई सब घूम आओ ये बुड्ढा कहाँ जायेगा….. मुसीबत है….हाहाहा …. देखा शिवम बेटा।”
.
शिवम हल्का सा मुस्कुराया लेकिन जब उसे लेकर पहाड़ पर चढ़ाई करनी थी। उसे काँधे पर बिठाकर चढ़ाई की। कभी रोने लगता या जिद पकड़ लेता तो समझाने में घंटो लग जाते थे।
अरे वो हमारी जवानी के दिन थे अब तो चला भी नहीं जाता। तुम लोग जहाँ घुमा दो।”
अचानक नानू की बातों में एक दर्द छलक आया।
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बातों बातों में घर आ गया। घर में घुसते ही नानी जी जो अक्सर नाना जी से गुस्से से बात करती थीं बोलीं-
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“सब लोग वैष्णों देवी जा रहें हैं…..”
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अचानक गॉगल्स के पीछे बूढ़ी आँखों में चमक आ गई।
नानी जी ने कहना जारी रखा-
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“…..आप घर पे रहेंगे कहीं पार्क वार्क मत जाईयेगा।”
और फिर चश्मे के पीछे की चमक गायब हो गई जैसे किसी गाँव में लाइट आई और गई।
शायद उस दर्द को शिवम ने समझ लिया था।
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पर नानू हँसे और बोले
.
“चलो भाई सब घूम आओ ये बुड्ढा कहाँ जायेगा…..मुसीबत है….हाहाहा …. देखा शिवम बेटा।”
.
शिवम हल्का सा मुस्कुराया लेकिन tubelight की रौशनी में चश्मे के अन्दर एक मोती चमक रहा था जिसे शायद नानू छिपा नहीं पाए।
.
“अरे नानू मैं हूँ ना हम लोग मूवी देखेंगे अमिताभ बच्चन वाली”
“हाँ भई ये ठीक है। हा हा हा…. ”
नानू एक दर्द भरी हँसी हँसे।
.
वक्त बीता , सब लोग गये , घूमे , वापिस घर आये। हफ्ते बीते और एक महीना हो गया।
.
हर रोज शिवम सोचता
.
“क्या बूढ़े सचमुच प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं? क्या सारे बूढ़े एक उम्र के बाद ऐसे ही हो जाते हैं एकदम बच्चों जैसे? क्या नई जनरेशन के लिए बूढों का कोई मतलब नहीं? क्या 4G नेटवर्क के जमाने वाले ….2G नेटवर्क वालों के जज्बातों की कदर नहीं करना चाहते? …….कल जब 7G आयेगा तो क्या हम 4G वालों की रेस्पेक्ट नहीं होगी? क्या ये ऐसे चलता रहेगा? क्या इसीलिए नानू ने मामा जी को काँधे पर बिठाकर घुमाया कि आज वो घर की रखवाली करें?
अरे माना नानू बहुत परेशान करते हैं। मैं भी कभी कभी परेशान हो जाता हूँ लेकिन…. यार वो मेरे नानू हैं..ऐसा behave मामा ने भी किया होगा जब वो बच्चे होंगे तब उनकी जिद या उनके रोने पर नानू ने उन्हें घर पे छोड़ा…….नहीं ना……तो फिर नानू के साथ ऐसा क्यूँ?”
.
अपने नये दिमाग में गज़ब का द्वंद लिए हुए शिवम एक महीने बाद फिर से जयपुर जा रहा था। रास्ते भर वो यही सब सोचता रहा।
.
ननिहाल पहुँचा…..
.
मामी नानी tv देख रही थी; मामा जी मोबाइल में व्यस्त थे।
नानू भी newspaper पढ़ रहे थे।
शिवम के पहुँचते ही अचानक टीवी का शोर कई तरह की आवाजों में बदल गया।
.
“अरे बेटा आ गये….”
“स्नेहा कुछ ठंडा ले आओ”
.
सबसे मिलने के बाद शिवम नाना जी की ओर देख कर बोला
“नानू जल्दी से रेडी हो जाओ मैं और आप वैष्णों देवी जा रहे हैं शाम 4 बजे की ट्रेन है…..जल्दी करो ।”
.
सब लोग अवाक……..एक दूसरे का मुंह ताकते रहे
.
“अरे ऐसे मत देखिये मेरी पहली सैलरी मिली है” शिवम ने माहौल की खामोशी तोड़ी।
.
और फिर खुद ही नानू के कमरे में पैकिंग करने चला गया। नानू चुपचाप बैठे कुछ सोचते रहे।
करीब 15 मिनट बाद शिवम आया और बोला-
.
“नानू ये आपके गॉगल्स ….सॉरी आई मीन चश्मा…… चलिए देर हो रही है”
.
दोनों 2G – 4G नेटवर्क साथ-साथ जा रहे थे।
.
जाते हुए चश्मा और गॉगल्स दोनों भीगे थे।
.
कुछ सिर झुके हुए थे
.
कुछ आँखे बेचैन
.
बस नानू की छड़ी उन दोनों को दूर जाती देखती रही आज पहली बार नानू को उसकी जरूरत नहीं थी।
.
नानू का हाथ शिवम के हाथ में था। tubelight की रौशनी में चश्मे के अन्दर एक मोती चमक रहा था जिसे शायद नानू छिपा नहीं पाए।
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“अरे नानू मैं हूँ ना हम लोग मूवी देखेंगे अमिताभ बच्चन वाली”
“हाँ भई ये ठीक है। हा हा हा…. ”
नानू एक दर्द भरी हँसी हँसे।
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वक्त बीता , सब लोग गये , घूमे , वापिस घर आये। हफ्ते बीते और एक महीना हो गया।
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हर रोज शिवम सोचता
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“क्या बूढ़े सचमुच प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं? क्या सारे बूढ़े एक उम्र के बाद ऐसे ही हो जाते हैं एकदम बच्चों जैसे? क्या नई जनरेशन के लिए बूढों का कोई मतलब नहीं? क्या 4G नेटवर्क के जमाने वाले ….2G नेटवर्क वालों के जज्बातों की कदर नहीं करना चाहते? …….कल जब 7G आयेगा तो क्या हम 4G वालों की रेस्पेक्ट नहीं होगी? क्या ये ऐसे चलता रहेगा? क्या इसीलिए नानू ने मामा जी को काँधे पर बिठाकर घुमाया कि आज वो घर की रखवाली करें?
अरे माना नानू बहुत परेशान करते हैं। मैं भी कभी कभी परेशान हो जाता हूँ लेकिन…. यार वो मेरे नानू हैं..ऐसा behave मामा ने भी किया होगा जब वो बच्चे होंगे तब उनकी जिद या उनके रोने पर नानू ने उन्हें घर पे छोड़ा…….नहीं ना……तो फिर नानू के साथ ऐसा क्यूँ?”
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अपने नये दिमाग में गज़ब का द्वंद लिए हुए शिवम एक महीने बाद फिर से जयपुर जा रहा था। रास्ते भर वो यही सब सोचता रहा।
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ननिहाल पहुँचा…..
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मामी नानी tv देख रही थी; मामा जी मोबाइल में व्यस्त थे।
नानू भी newspaper पढ़ रहे थे।
शिवम के पहुँचते ही अचानक टीवी का शोर कई तरह की आवाजों में बदल गया।
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“अरे बेटा आ गये….”
“स्नेहा कुछ ठंडा ले आओ”
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सबसे मिलने के बाद शिवम नाना जी की ओर देख कर बोला
“नानू जल्दी से रेडी हो जाओ मैं और आप वैष्णों देवी जा रहे हैं शाम 4 बजे की ट्रेन है…..जल्दी करो ।”
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सब लोग अवाक……..एक दूसरे का मुंह ताकते रहे
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“अरे ऐसे मत देखिये मेरी पहली सैलरी मिली है” शिवम ने माहौल की खामोशी तोड़ी।
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और फिर खुद ही नानू के कमरे में पैकिंग करने चला गया। नानू चुपचाप बैठे कुछ सोचते रहे।
करीब 15 मिनट बाद शिवम आया और बोला-
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“नानू ये आपके गॉगल्स ….सॉरी आई मीन चश्मा…… चलिए देर हो रही है”
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दोनों 2G – 4G नेटवर्क साथ-साथ जा रहे थे।
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जाते हुए चश्मा और गॉगल्स दोनों भीगे थे।
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कुछ सिर झुके हुए थे
.
कुछ आँखे बेचैन
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बस नानू की छड़ी उन दोनों को दूर जाती देखती रही आज पहली बार नानू को उसकी जरूरत नहीं थी।
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नानू का हाथ शिवम के हाथ में था।

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