प्रेमिका से शादी -Story of my college, IIT(BHU)

शीर्षक कुछ अजीब सा है ना……. अरे कोई नहीं कुछ ऐसा ही है।
हमारे समाज में कहा जाता है कि लव मैरिज ज्यादा सफल नहीं रहतीं।
मेरा इस कॉलेज में आना कुछ कुछ ऐसा ही प्रसंग है। जैसे किसी आशिक़ ने घर वालों के खिलाफ जाकर अपनी मोहब्बत से निकाह कर लिया हो, और अब समझ में आ रहा हो कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं और घर की मुर्गी दाल बराबार।
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खैर अब तो तलाक–तलाक–तलाक भी काम नहीं आएगा, जो होना था सो हो गया।
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जो सपने हमने देखे थे उनकी कल्पनाओं ने जितना सुख दिया जब वो सपने साकार हुए तो उनकी वास्तविकताओं ने उतना सुख नहीं दिया।(For 90% of IITians of any IIT the statement is true)
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चलो कहानी पर आते हैं-
अभियांत्रिकी चित्रकला (ENGINEERING DRAWING—ED) की कक्षा में प्रवेश किया। बताते चलें यहाँ 8 बजे का मतलब 8 बजे बस…..उसके बाद प्रवेश निषेध।
कक्षा में घुसते ही पान की लाजवाब खुशबू। इसी खुशबू का स्रोत मुँह में भरे हुए एक कर्मचारी बोर्ड साफ़ कर रहा था।
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जब सब बैठ गए तो कर्मचारी पान को गाल के एक तरफ दबा कर फिर प्रेम चोपड़ा के जैसे लाल लाल दाँत दिखाते हुए बोला
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“MY SELF PROFESSOR _XYZ_MECHANICAL DEPARTMENT”
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ओये तेरी कर्मचारी नहीं प्राचार्य था।
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इस कक्षा में 4 घण्टे खड़े रहना पड़ता है।
हमने आँखों की कनखियों से देखा तो प्रोफेसर साहब एक और पान मुँह में रखते हुए कह रहे थे-
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“पिछले साल बोग्गा बच्चे आवा रहेंलि, येहि साल सही है”।
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मैकेनिकल डिपार्टमेंट का wifi गज़ब है।
यही वजह है कि ED CLASS से ज्यादा प्रॉब्लम नहीं होती।
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कुछ दूरी पर हमारा अगला क्लास था। जैसे ही दरवाजे पर पहुँचे।
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एक बिजूका (SCARECROW) जैसी कलाकृति विद्यमान थी। हमने अपने मन में पूछा आप बच्चों को भगाने के लिये टिकाये गए हैं।
फिर पूछा thermodynamics का क्लास यही है।
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1min मेरी शक्ल देखते रहा फिर पान थूंककर बोले हाँ अंदर जाओ।
बैठते ही न जाने कब नींद आ गयी। तेज गर्मी से नींद टूटी बोर्ड पर ध्यान से देखा एक मानव जैसी अनुभूति लिए हुए कुछ 65 की उम्र पैजामे जैसी पैंट के ऊपर टँगी हुई एक झोला टाइप शर्ट पहने कोई खड़ा था।
फिर आवाज आई
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” I AM THE CONVENER OF THE THERMODYNAMICS COURSE”
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लंच के बाद की क्लास थी तो बहुत तेज नींद आ रही थी……. लम्बे संघर्ष के बाद ऑंखें खोल कर देखा तो वही कलाकृति THERMODYNAMICS पढ़ाने की कोशिश कर रही थी।
किन्तु असफल हो रही थी।
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बूढ़े प्रोफेसरों को पढ़ाना अच्छा नहीं लगता या फिर उनके पढ़ाने का तरीका मुझे समझ नहीं आता।(Just a general statement)
×××सेल्फ स्टडी के भरोसे लाइफ चलेगी अब तो×××
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क्लास के सबसे तेज चल रहे पंखें के नीचे बैठा था, फिर भी इतनी गर्मी। वैसे उस पंखें से तेज टॉयलेट वाला एग्जॉस्ट फैन चलता है।
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2 से 5 की 3 क्लासेज में अगर लाइट चली जाये तो बस मुँह से यही दुआ निकलती है कि
“हे विश्वनाथ बाबा लाइट आ गयी तो आज ही 10 रूपये का प्रसाद चढ़ाऊंगा VT में।”
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खैर पढ़ाई का तरीका नहीं बदला ज्यादातर टीचर्स वही स्कूल के टीचर्स की तरह पढ़ाते हैं।
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हाँ एक दो प्रोफेसर गज़ब हैं बस उनको सुन लो तो पढ़ने की जरूरत नहीं।
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वैसे तो आप सब लोग जानते होंगे यहाँ हरियाली बहुत है।
फिर भी यहाँ मैकेनिकल जैसे डिपार्टमेंट एक विशेष प्रकार के सूखे से ग्रसित हैं।
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120 में सिर्फ 1
वैसे इस क्षेत्र में भी बहुत कम्पटीशन है।
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वाटर कूलर में बहुत बड़ी खराबी है कंपनी ने मिसप्रिंट कर दी है, इस पर हीटर की जगह कूलर लिख दिया।
ये 60-80 ℃ का पानी देता है।
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हॉस्टल की बात न करिये wifi न होकर LAN इंटरनेट कनेक्शन है। जो कि सिर्फ लैपटॉप पर चलता है।
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हाँलाँकि लैपटॉप में कुछ स्मार्टनेस दिखा कर हम उस LAN को wifi hotspot बना देते हैं।
पर समस्या यहीं ख़त्म नहीं होती।
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मेरा एक दोस्त बहुत परेशान पूछा भाई क्या हो गया कह रहा है – उसकी महिला मित्र ने उससे लड़ाई कर ली।
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मैंने बोला भाई मित्रों में लड़ाई चला करती है। वैसे तुमने गलती क्या की थी।
बोला भाई उससे बात कर रहा था उसने बोला बोलो ILU और इतने में LAN कनेक्शन चला गया। जब 10 min में आया तब तक काँड हो गया।
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यहाँ कई सारे क्लब्स हैं MUSIC, THEATRE, LITERARURE, DANCE, QUIZ, SOCIAL WORK, FILM & MEDIA, SPORTS
एक और सबसे ख़ास SCIENCE & TECHNOLOGY
ये वाटर रॉकेट, रोबोट, टेलिस्कोप जैसी चीजें बनवाते हैं और कम्पटीशन होता है।
ख़ास बात ये है कि हर साल यही 3 चीजें बनवाते हैं।
हद तो तब हो गयी जब यहाँ हॉस्टल का गार्ड आपसे ज्यादा जानता है कि किस महीने क्या बनता है, कितना खर्चा आता है, उसे रट गया है।
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मतलब कुछ भी अविष्कारिक नहीं बस ही 3–4 चीजें हर साल बनवाते हैं।
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कुछ क्लब्स तो “जब तक है जान” या “दिलवाले” फ़िल्म की तरह है ट्रेलर में तो बहुत अच्छे लेकिन……….. क्या कहें बड़ी बड़ी बातें और नतीजा ठनठन गोपाल।
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एक पोंडी बाबा हैं हॉस्टल में पढ़ाई लिखाई से जुड़ा हर सामान बेचने आते हैं।
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सायकल पर कुर्ता पायजामा पहने हुए 55 की उम्र का एक शख्स जिसे B.TECH. के बारे में प्रोफेसरों से ज्यादा पता है।
कौन सी किताब पढ़नी चाहिए कौन सी नहीं सब पता है इसे।
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हमारे कॉलेज की जितनी प्रशंसा की जाय कम है।
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यहाँ के 90% लोग एक विशेष प्रकार की मानसिकता से पीड़ित हैं वो है सम्मान करवाने की इच्छा। चाहे स्टूडेंट्स हों या प्रोफेसर।
कोई इज्जत बनाना नहीं चाहता बस ये चाहता है कि नए बच्चे इज्जत करें।
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अरे भाई अच्छे से व्यवहार करो सब इज्जत करेंगे।
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यहाँ एक बड़ी मार्केट है जहाँ हर साल नए बच्चे ठगे जाते हैं।
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एक और ख़ास बात है यहाँ का “खानदान”– मतलब हर नए बच्चे का रोल नं जितना है लास्ट इयर ये जिसका था वो उसका “TECHDAD” हो गया उसके पीछे साल वाला उसका “TECHDAADU” and so on……
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कुछ TECHDAD होते हैं कुछ TECHDEAD होते हैं
मतलब एक सक्रिय जूनियर को एक निष्क्रिय TECHDAD मिल जाये।
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वैसे हमारे सीनियर्स बहुत अच्छे हैं, रैगिंग के नाम पर यहाँ कुछ नहीं है
(हाँ कभी कभी कुछ सीनियर्स मौज ले लेंगे आपको पता भी नहीं चलेगा)
पढ़ाई में बहुत हेल्प करते हैं हमारे सीनियर्स।
हाँ ज्यादा नहीं बोलूँगा पर कुछ लोग कलेवा खा रहे जमाई जी की तरह व्यवहार करते हैं।
जब तक सोने की चेन नहीं मिलती विदाई नहीं होगी
समझने वाले समझ गए होंगे
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और भी बहुत कुछ है पर आप लोग समझोगे नहीं पहले से ही इतना लिख चुका हूँ।
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pilot training से लेकर धर्म विज्ञान तक सब सिखाया जाता है।
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IIT BHU IIT नही लगता
यहाँ के प्रोफेसरों को ज्ञान तो है शक्ल नहीं
बड़ाई नहीं करूँगा शैक्षणिक स्तर पर सब जानते हैं पिछले साल का 2.03 crore का Highest Package यहीं से था।
ये सब तो हर IIT में है
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लेकिन यहाँ कुछ है जो खुश रखता है शायद आम के पेड़ पर चिड़िया का घोसला।
एक बिल्ली जो हमारे हॉस्टल की पालतू बिल्ली है।
कुछ गौ माताएँ जिनके गोबर से आपको तकलीफ भले ही हो पर नफरत नहीं।
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भले ही मेडिकल वाले स्टूडेंट्स पूरे BHU में आग लगा दें।
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यहाँ की हरियाली नष्ट नहीं होगी।
वो संस्कार नष्ट नहीं होगा जब चपरासी अंकल पानी लाते हैं और धन्यवाद बोलने पर हाथ जोड़कर अभिवादन करते हैं।
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यहाँ की कार्यशैली में बहुत राजनीति भी है जिससे प्रोफेसर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक सब परेशान हैं……लेकिन एक बार मधुबन जाकर 2 min शांति से ऑंखें बन्द करो तो जीवन की वास्तविकता का अनुभव होता है।
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समझ आता है कि विश्विद्यालय के केंद्र में मंदिर का क्या महत्त्व है। क्यों वर्कशॉप्स में विश्वकर्मा की पूजा होती है।
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बस अफ़सोस है हर डिपार्टमेंट में मालवीय जी की मूर्ति पर रोज सुबह माल्यार्पण होता है।लेकिन हमने उनसे कुछ नहीं सीखा।
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अँग्रेज़ आँखों पर चश्मा लगाए हुए दिखेंगे यहाँ पर बहुत सारे।
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पर आप आँखों से चश्मा उतारकर आँखें बन्द करिये और संन्यासियों की तरह खुद को भूल कर आनंद लीजिये यहाँ कि हवा का जिसमे शिव शंकर का वैराग्य भी है, शिव और शिवा का प्रेम भी है, एक भोले से नाथ हैं।
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एक माँ है गंगा माँ THE GANGES मत बोलना।
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महसूस करो तो इतनी टेंशन के बाद भी कोई है जो कहता है कि
दुखी होकर तांडव नहीं करना है, और न ही माँ सती रुपी दुःख और चिंता का बोझ काँधे पर लेकर चलना है।
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यहाँ आकर सबसे पहली बात यही सीखी कि
जिन्दा मत रहो जियो।
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IIT तो केवल एक जरिया है मुझे जो पाना है उसका रास्ता यहीं से है.
No Institute can even touch the greatness of my institue.

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