लम्हा…

हम कभी साथ हों न हों पर कुछ तो रहेगा दरमियाँ कल हमें याद आयेगा साथ गुज़रा वो हर लमहा लम्हे जहाँ साथ हम साथ तुम लम्हे जहाँ तेरी यादें है गुम लम्हें जहाँ तेरी शैतानियाँ हैं लम्हें जहाँ मेरी मनमानियाँ हैं लम्हें जहाँ तेरी नाराज़गी थी लम्हें जहाँ प्यार था दोस्ती थी तस्वीर में […]

अल्फ़ाज़ मेरे होंगे….

1. अक्षर अक्षर लिखा तुमको, मैंने एक डायरी में। मैं अक्सर जो कहता तुमसे, कविता और शायरी में। बिना सुरों का बिना ताल का, मैं इक गीत बेचारा था। होठों की सरगम से छूकर, तुमने जिसे सँवारा था। तुमसे मिलकर गीत लिखे कुछ, बस यही सोचकर मैंने……….. शायद मेरे इन गीतों में, कुछ साज तेरे […]

एग्जामिनेशन हॉल

आज खामोश होकर वो मुझे देखती ही रही। जैसे अभी-अभी, नया सा बाली उमर का प्यार हो।। कितने सवाल थे मेरे दिल में उससे पूछने को। पर वो कुछ न बोली, कहा चुप रहो बस प्यार हो। मैं उसको बाँहों में थामे, उँगलियों से छेड़ते ये सोचता रहा ये वही #कलम है जो अक्सर #कुछ_न_कुछ […]

अल्फाज़ तेरे मेरे

  अल्फाज़ तेरे मेरे….. अक्सर ही अकेले में….. चोरी से चुपके से…… कुछ बातें करते हैं……. कि ख्वाब तेरे मेरे…… तनहा सी रातों में…… आसमां के नीचे…… मुलाकातें करते हैं…… देखा है हमने भी…… आँखों के कोनों से…… ये नैन तेरे मुझ बिन……. बरसातें करते हैं……. चोरी से चुपके से……. कुछ बातें करते हैं…….