ख्वाहिश….

हर उम्र की होती है…… एक ख्वाहिश उम्र ख़त्म ख्वाहिश ख़त्म……. फिर हँसते हैं खुद पर …. हट…..कितने पागल थे हम……. . 1. “मुझे भी मिलना है परी से……” “पर वो तो अच्छे बच्चों से मिलती है” “दादी मैं अच्छा बच्चा बनूँगा” पता चला….परियाँ नहीं होतीं ख्वाहिश थी…… उम्र ख़त्म…… ख्वाहिश ख़त्म…… . 2. “हम […]

अल्फाज़ तेरे मेरे

  अल्फाज़ तेरे मेरे….. अक्सर ही अकेले में….. चोरी से चुपके से…… कुछ बातें करते हैं……. कि ख्वाब तेरे मेरे…… तनहा सी रातों में…… आसमां के नीचे…… मुलाकातें करते हैं…… देखा है हमने भी…… आँखों के कोनों से…… ये नैन तेरे मुझ बिन……. बरसातें करते हैं……. चोरी से चुपके से……. कुछ बातें करते हैं…….