ख्वाहिश….

हर उम्र की होती है…… एक ख्वाहिश उम्र ख़त्म ख्वाहिश ख़त्म……. फिर हँसते हैं खुद पर …. हट…..कितने पागल थे हम……. . 1. “मुझे भी मिलना है परी से……” “पर वो तो अच्छे बच्चों से मिलती है” “दादी मैं अच्छा बच्चा बनूँगा” पता चला….परियाँ नहीं होतीं ख्वाहिश थी…… उम्र ख़त्म…… ख्वाहिश ख़त्म…… . 2. “हम […]

अल्फ़ाज़ मेरे होंगे….

1. अक्षर अक्षर लिखा तुमको, मैंने एक डायरी में। मैं अक्सर जो कहता तुमसे, कविता और शायरी में। बिना सुरों का बिना ताल का, मैं इक गीत बेचारा था। होठों की सरगम से छूकर, तुमने जिसे सँवारा था। तुमसे मिलकर गीत लिखे कुछ, बस यही सोचकर मैंने……….. शायद मेरे इन गीतों में, कुछ साज तेरे […]